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सहीह मुस्लिम

नंबर 7445

नंबर 7445किताब 55, नंबर 29अरबी नंबरिंग 2970.03
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ يَزِيدَ، يُحَدِّثُ عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهَا قَالَتْ مَا شَبِعَ آلُ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم مِنْ خُبْزِ شَعِيرٍ يَوْمَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ حَتَّى قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
A'isha reported:Never did the family of Muhammad (ﷺ) eat to the fill the bread of barley for two successive days until Allah's Messenger (ﷺ) died

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।