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सहीह मुस्लिम

नंबर 7446

नंबर 7446किताब 55, नंबर 30अरबी नंबरिंग 2970.04
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَابِسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا شَبِعَ آلُ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم مِنْ خُبْزِ بُرٍّ فَوْقَ ثَلاَثٍ ‏.‏
A'isha reported:Never could the family of Muhammad (ﷺ) (afford to eat to the fill) the bread of wheat beyond three days (successively)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।