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सहीह मुस्लिम

नंबर 7444

नंबर 7444किताब 55, नंबर 28अरबी नंबरिंग 2970.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا شَبِعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثَلاَثَةَ أَيَّامٍ تِبَاعًا مِنْ خُبْزِ بُرٍّ حَتَّى مَضَى لِسَبِيلِهِ ‏.‏
A'isha reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Never did Allah's Messenger (ﷺ) eat to his fill the bread of wheat for three successive days until he had run the course of his life

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।