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सहीह मुस्लिम

नंबर 7443

नंबर 7443किताब 55, नंबर 27अरबी नंबरिंग 2970.01
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا شَبِعَ آلُ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم مُنْذُ قَدِمَ الْمَدِينَةَ مِنْ طَعَامِ بُرٍّ ثَلاَثَ لَيَالٍ تِبَاعًا حَتَّى قُبِضَ ‏.‏
A'isha reported:Never had the family of Muhammad (ﷺ) eaten to the fill since their, arrival in Medina with the bread of wheat for three successive nights until his (Holy Prophet's) death

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।