सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7442

नंबर 7442किताब 55, नंबर 26अरबी नंबरिंग 1055.04
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، قَالَ سَمِعْتُ الأَعْمَشَ، ذَكَرَ عَنْ عُمَارَةَ، بْنِ الْقَعْقَاعِ بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ كَفَافًا ‏"‏ ‏.‏
Umara b. al-Qa'qa' reported this hadith with the same chain of transmitters but instead of the word" qut" (bare subsistence) there has been used the word" Kafaf" (adequate means to meet the needs)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।