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सहीह मुस्लिम

नंबर 7441

नंबर 7441किताब 55, नंबर 25अरबी नंबरिंग 1055.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالُوا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ اللَّهُمَّ اجْعَلْ رِزْقَ آلِ مُحَمَّدٍ قُوتًا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ عَمْرٍو ‏"‏ اللَّهُمَّ ارْزُقْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:0 Allah, provide for the, family of Muhammad their subsistence, and in the narration transmitted on the authority of 'Amr (the words are):" O Allah, provide us subsistence

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।