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सहीह मुस्लिम

नंबर 7273

नंबर 7273किताब 54, नंबर 39अरबी नंबरिंग 2894.02
وَحَدَّثَنِي أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا رَوْحٌ، عَنْ سُهَيْلٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَزَادَ فَقَالَ أَبِي إِنْ رَأَيْتَهُ فَلاَ تَقْرَبَنَّهُ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Suhail with the same chain of transmitters but with this addition:" My father said: If you see that, do not even go near it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।