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सहीह मुस्लिम

नंबर 7274

नंबर 7274किताब 54, नंबर 40अरबी नंबरिंग 2894.03
حَدَّثَنَا أَبُو مَسْعُودٍ، سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ السَّكُونِيُّ، عَنْ عُبَيْدِ، اللَّهِ عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يُوشِكُ الْفُرَاتُ أَنْ يَحْسِرَ عَنْ كَنْزٍ مِنْ ذَهَبٍ فَمَنْ حَضَرَهُ فَلاَ يَأْخُذْ مِنْهُ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The Last Hour would not come unless the Euphrates would uncover a treasure of gold, so he who finds it should not take anything out of that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।