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सहीह मुस्लिम

नंबर 7272

नंबर 7272किताब 54, नंबर 38अरबी नंबरिंग 2894.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْقَارِيَّ - عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَحْسِرَ الْفُرَاتُ عَنْ جَبَلٍ مِنْ ذَهَبٍ يَقْتَتِلُ النَّاسُ عَلَيْهِ فَيُقْتَلُ مِنْ كُلِّ مِائَةٍ تِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ وَيَقُولُ كُلُّ رَجُلٍ مِنْهُمْ لَعَلِّي أَكُونُ أَنَا الَّذِي أَنْجُو ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The Last Hour would not come before the Euphrates uncovers a mountain of gold, for which people would fight. Ninety-nine out of each one hundred would die but every man amongst them would say that perhaps he would be the one who would be saved (and thus possess this gold)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।