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सहीह मुस्लिम

नंबर 7169

नंबर 7169किताब 53, नंबर 38अरबी नंबरिंग 2845.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ قَالَ قَتَادَةُ سَمِعْتُ أَبَا نَضْرَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ سَمُرَةَ، أَنَّهُ سَمِعَ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ مِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ النَّارُ إِلَى كَعْبَيْهِ وَمِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ إِلَى حُجْزَتِهِ وَمِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ إِلَى عُنُقِهِ ‏"‏ ‏.‏
Samura b. Jundub reported Allah's Apostle (may peace -be upon him) as saying:There will be some to whose ankels the fire will reach, some to whose knees, some to whose waist the fire will reach, and some to whose collar-bone the fire will reach

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।