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सहीह मुस्लिम

नंबर 7170

नंबर 7170किताब 53, नंबर 39अरबी नंबरिंग 2845.02
حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ زُرَارَةَ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، - يَعْنِي ابْنَ عَطَاءٍ - عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا نَضْرَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ النَّارُ إِلَى كَعْبَيْهِ وَمِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ النَّارُ إِلَى رُكْبَتَيْهِ وَمِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ النَّارُ إِلَى حُجْزَتِهِ وَمِنْهُمْ مَنْ تَأْخُذُهُ النَّارُ إِلَى تَرْقُوَتِهِ ‏"‏ ‏.‏
Samura b. Jundub reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There would be among them those to whom the fire will reach up to their ankels and to some of them the fire would reach their knees and to some it would reach their waists and to some it would reach up to their collar-bones

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।