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सहीह मुस्लिम

नंबर 7168

नंबर 7168किताब 53, नंबर 37अरबी नंबरिंग 2844.02
وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ كَيْسَانَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ هَذَا وَقَعَ فِي أَسْفَلِهَا فَسَمِعْتُمْ وَجْبَتَهَا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Abfi Huraira with the same chain of transmitters but with this change of wording that the Prophet (may. peace be upon him) said:It reached at its base and you heard its sound

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।