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सहीह मुस्लिम

नंबर 7167

नंबर 7167किताब 53, नंबर 36अरबी नंबरिंग 2844.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ خَلِيفَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ، عَنْ أَبِي، حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذْ سَمِعَ وَجْبَةً فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ تَدْرُونَ مَا هَذَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ قُلْنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هَذَا حَجَرٌ رُمِيَ بِهِ فِي النَّارِ مُنْذُ سَبْعِينَ خَرِيفًا فَهُوَ يَهْوِي فِي النَّارِ الآنَ حَتَّى انْتَهَى إِلَى قَعْرِهَا ‏"‏ ‏.‏
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे कि अचानक कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी। चुनांचे आपने फरमाया : "क्या तुम जानते हो कि यह क्या है?" हमने कहा : अल्लाह एवं उसका रसूल बेहतर जानते हैं। फ़रमाया : "यह एक पत्थर है, जो सत्तर साल पहले जहन्नम में फेंका गया था। वह अब तक गिरता रहा और अब जाकर उसकी गहराई में जा पहुँचा है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।