सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1489

नंबर 1489किताब 5, नंबर 322अरबी नंबरिंग 655.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْمُهَاجِرِ، عَنْ أَبِي الشَّعْثَاءِ، قَالَ كُنَّا قُعُودًا فِي الْمَسْجِدِ مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَ فَأَذَّنَ الْمُؤَذِّنُ فَقَامَ رَجُلٌ مِنَ الْمَسْجِدِ يَمْشِي فَأَتْبَعَهُ أَبُو هُرَيْرَةَ بَصَرَهُ حَتَّى خَرَجَ مِنَ الْمَسْجِدِ فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ أَمَّا هَذَا فَقَدْ عَصَى أَبَا الْقَاسِمِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Abu Sha'tha' reported:While we were sitting with Abu Huraira in a mosque a man went out of the mosque after the call to prayer had been announced. (A man stood up in the mosque and set off.) Abu Huraira's eyes followed him till he went out of the mosque. Upon this Abu Huraira said: This man has disobeyed Abu'l- Qasim (Muhammad) (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।