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सहीह मुस्लिम

नंबर 1486

नंबर 1486किताब 5, नंबर 319अरबी नंबरिंग 653
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، وَيَعْقُوبُ الدَّوْرَقِيُّ، كُلُّهُمْ عَنْ مَرْوَانَ الْفَزَارِيِّ، - قَالَ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا الْفَزَارِيُّ، - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ الأَصَمِّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ الأَصَمِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ أَعْمَى فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ لَيْسَ لِي قَائِدٌ يَقُودُنِي إِلَى الْمَسْجِدِ ‏.‏ فَسَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُرَخِّصَ لَهُ فَيُصَلِّيَ فِي بَيْتِهِ فَرَخَّصَ لَهُ فَلَمَّا وَلَّى دَعَاهُ فَقَالَ ‏"‏ هَلْ تَسْمَعُ النِّدَاءَ بِالصَّلاَةِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَأَجِبْ ‏"‏ ‏.‏
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास एक अंधा व्यक्ति आया, तथा कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे पास कोई आदमी नहीं है जो मुझे मस्जिद ले आए। अतः उसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से घर में नमाज़ पढ़ने की छूट माँगी, तो आपने (पहले तो) उसे छूट दे दी, लेकिन जब वह जाने लगा, तो उसे बुलाया और फ़रमाया : “क्या तुम नमाज़ के लिए पुकारी जाने वाली अज़ान को सुनते हो?” उसने कहा : हाँ, सुनता हूँ, तो आप ने फ़रमाया : “फिर तो तुम अवश्य उसको ग्रहण करो (अर्थाथ; माज़ पढ़ने के लिए मस्जिद आओ)।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।