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सहीह मुस्लिम

नंबर 1485

नंबर 1485किताब 5, नंबर 318अरबी नंबरिंग 652
وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي الأَحْوَصِ، سَمِعَهُ مِنْهُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لِقَوْمٍ يَتَخَلَّفُونَ عَنِ الْجُمُعَةِ ‏ "‏ لَقَدْ هَمَمْتُ أَنْ آمُرَ رَجُلاً يُصَلِّي بِالنَّاسِ ثُمَّ أُحَرِّقَ عَلَى رِجَالٍ يَتَخَلَّفُونَ عَنِ الْجُمُعَةِ بُيُوتَهُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying about people who are absent from Jumu'a prayer:I intend that I should command a person to lead people in prayer, and then burn those persons who absent themselves from Jumu'a prayer in their houses

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।