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सहीह मुस्लिम

नंबर 1442

नंबर 1442किताब 5, नंबर 275अरबी नंबरिंग 637.02
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبُ بْنُ إِسْحَاقَ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو النَّجَاشِيِّ، حَدَّثَنِي رَافِعُ بْنُ خَدِيجٍ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي الْمَغْرِبَ ‏.‏ بِنَحْوِهِ ‏.‏
A hadith like this, i. e." We used to observe evening prayer...." so on and so forth, has been narrated by Rafi' b. Khadij by another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।