وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِهْرَانَ الرَّازِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو النَّجَاشِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ رَافِعَ بْنَ خَدِيجٍ، يَقُولُ كُنَّا نُصَلِّي الْمَغْرِبَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَيَنْصَرِفُ أَحَدُنَا وَإِنَّهُ لَيُبْصِرُ مَوَاقِعَ نَبْلِهِ .
Rafi' b. Khadij reported:We used to observe the evening prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) and then one of us would go away and he could see the (distant) place where his arrow would fall
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।