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सहीह मुस्लिम

नंबर 1349

नंबर 1349किताब 5, नंबर 186अरबी नंबरिंग 596.01
وَحَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عِيسَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، أَخْبَرَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْحَكَمَ بْنَ عُتَيْبَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مُعَقِّبَاتٌ لاَ يَخِيبُ قَائِلُهُنَّ - أَوْ فَاعِلُهُنَّ - دُبُرَ كُلِّ صَلاَةٍ مَكْتُوبَةٍ ثَلاَثٌ وَثَلاَثُونَ تَسْبِيحَةً وَثَلاَثٌ وَثَلاَثُونَ تَحْمِيدَةً وَأَرْبَعٌ وَثَلاَثُونَ تَكْبِيرَةً ‏"‏ ‏.‏
काब बिन उजरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "प्रत्येक फ़र्ज नमाज़ के पश्चात कही जाने वाली तसबीहों को कहने वाले -या उनका पालन करने वाले- नाकाम नहीं होंगे। अर्थात 33 बार सुबहानल्लाह, 33 बार अल-हम्दु लिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।