इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ अज़कार के बारे में बात की है, जिन्हें पढ़ने वाला घाटे में नहीं रहता और शर्मिंदा नहीं होता। उसे उनका सवाब ज़रूर मिलता है। ये ऐसे शब्द हैं, जो एक-दूसरे के बाद आते और फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद पढ़े जाते हैं। ये शब्द हैं : "सुबहानल्लाह" तैंतीस बार। इसका अर्थ यह है कि अल्लाह हर कमी एवं ऐब से पाक है। "अल-हमदु लिल्लाह" तैंतीस बार। यानी इस बात की घोषणा कि अल्लाह हर दृष्टिकोण से परिपूर्ण है, साथ ही उससे मोहब्बत करना और उसका सम्मान करना। "अल्लाहु अकबर" चौंतीस बार। यानी अल्लाह दुनिया की सारी चीज़ों से बड़ा, महान और शक्तिशाली है।
- अल्लाह की पाकी, प्रशंसा और बड़ाई बयान करने का महत्व। और इनको बाक़ी रहने वाले नेक आमाल कहा गया है।
صحيح مسلم (1/ 418) (596). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 501). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 976). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (2/ 766). تيسير العلام، للبسام (ص227). فيض القدير شرح الجامع الصغير، لزين الدين المناوي (5/ 525).