सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1302

नंबर 1302किताब 5, नंबर 140अरबी नंबरिंग 578.04
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ، مَوْلَى بَنِي مَخْزُومٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ سَجَدَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي ‏{‏ إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ‏}‏ وَ ‏{‏ اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ‏}‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) prostrated himself (while reciting these verses)." When the heaven burst asunder" ;" Read in the name of Thy Lord

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।