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सहीह मुस्लिम

नंबर 1277

नंबर 1277किताब 5, नंबर 115अरबी नंबरिंग 572.04
حَدَّثَنَاهُ إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ الأُمَوِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مَنْصُورٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ فَلْيَتَحَرَّ الصَّوَابَ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Mansur with the same chain of transmitters with the words:He should aim at what is correct and complete

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।