सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1276

नंबर 1276किताब 5, नंबर 114अरबी नंबरिंग 572.03
وَحَدَّثَنَاهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَسَّانَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ مَنْصُورٌ ‏ "‏ فَلْيَنْظُرْ أَحْرَى ذَلِكَ لِلصَّوَابِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith is reported by Mansur with the same chain of transmitters, but with these words:" He should aim at correct (prayer) and it is advisable

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।