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सहीह मुस्लिम

नंबर 1248

नंबर 1248किताब 5, नंबर 86अरबी नंबरिंग 561.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، - وَهُوَ الْقَطَّانُ - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، قَالَ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ فِي غَزْوَةِ خَيْبَرَ ‏ "‏ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ - يَعْنِي الثُّومَ - فَلاَ يَأْتِيَنَّ الْمَسَاجِدَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ زُهَيْرٌ فِي غَزْوَةٍ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ خَيْبَرَ ‏.‏
Ibn 'Umar reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said during the battle of Khaybar: He who ate of this plant, i. e. garlic, should not come to the mosques. In the narration of Zubair, there is only a mention of" battle" and not of Khaybar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।