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सहीह मुस्लिम

नंबर 1245

नंबर 1245किताब 5, नंबर 83अरबी नंबरिंग 559.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ الْمُسَيَّبِيُّ، حَدَّثَنِي أَنَسٌ، - يَعْنِي ابْنَ عِيَاضٍ - عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، ح وَحَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ مَسْعُودٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ مُوسَى، عَنْ أَيُّوبَ، كُلُّهُمْ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ ‏.‏
A hadith like this has been narrated from the Messenger of Allah (ﷺ) on the authority of Ibn 'Umar with another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।