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सहीह मुस्लिम

नंबर 1244

नंबर 1244किताब 5, नंबर 82अरबी नंबरिंग 559.01
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، قَالَ وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا وُضِعَ عَشَاءُ أَحَدِكُمْ وَأُقِيمَتِ الصَّلاَةُ فَابْدَءُوا بِالْعَشَاءِ وَلاَ يَعْجَلَنَّ حَتَّى يَفْرُغَ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: When the supper is served to any one of you and the prayer also begins. (in such a case) first take supper, and do not make haste (for prayer) till you have (taken the food)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।