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सहीह मुस्लिम

नंबर 1239

नंबर 1239किताब 5, नंबर 77अरबी नंबरिंग 556.02
حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي فِي خَمِيصَةٍ ذَاتِ أَعْلاَمٍ فَنَظَرَ إِلَى عَلَمِهَا فَلَمَّا قَضَى صَلاَتَهُ قَالَ ‏ "‏ اذْهَبُوا بِهَذِهِ الْخَمِيصَةِ إِلَى أَبِي جَهْمِ بْنِ حُذَيْفَةَ وَائْتُونِي بِأَنْبِجَانِيِّهِ فَإِنَّهَا أَلْهَتْنِي آنِفًا فِي صَلاَتِي ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported:The Messenger of Allah (ﷺ) stood for prayer with a garment which had designs over it. He looked at these designs and after completing the prayer said: Take this garment to Abu Jahm b. Hudhaifa and bring me a blanket for it has distracted me just now

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।