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सहीह मुस्लिम

नंबर 1197

नंबर 1197किताब 5, नंबर 37अरबी नंबरिंग 535.04
حَدَّثَنِي الْحَكَمُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ عَدِيٍّ، عَنِ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، قَالَ صَلَّيْتُ إِلَى جَنْبِ أَبِي فَلَمَّا رَكَعْتُ شَبَّكْتُ أَصَابِعِي وَجَعَلْتُهُمَا بَيْنَ رُكْبَتَىَّ فَضَرَبَ يَدَىَّ فَلَمَّا صَلَّى قَالَ قَدْ كُنَّا نَفْعَلُ هَذَا ثُمَّ أُمِرْنَا أَنْ نَرْفَعَ إِلَى الرُّكَبِ ‏.‏
Mus'ab b. Sa'd b. Abu Waqqas reported:I said prayer by the side of my father. When I bowed I intertwined my fingers and placed them between my knees. He struck my hands. When he completed the prayer he said: We used to do that but then were commanded to lift (our palms) to the knees

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।