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सहीह मुस्लिम

नंबर 6778

नंबर 6778किताब 47, नंबर 4अरबी नंबरिंग 2667.02
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عِمْرَانَ، الْجَوْنِيُّ عَنْ جُنْدَبٍ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ اللَّهِ - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ اقْرَءُوا الْقُرْآنَ مَا ائْتَلَفَتْ عَلَيْهِ قُلُوبُكُمْ فَإِذَا اخْتَلَفْتُمْ فَقُومُوا ‏"‏ ‏.‏
Jundub (i. e. Ibn 'Abdullah) reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:Recite the Qur'an as long as your hearts agree to do so and when you find variance between them, then stand up

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book of Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।