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सहीह मुस्लिम

नंबर 6777

नंबर 6777किताब 47, नंबर 3अरबी नंबरिंग 2667.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا أَبُو قُدَامَةَ الْحَارِثُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنْ أَبِي عِمْرَانَ، عَنْ جُنْدُبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْبَجَلِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اقْرَءُوا الْقُرْآنَ مَا ائْتَلَفَتْ عَلَيْهِ قُلُوبُكُمْ فَإِذَا اخْتَلَفْتُمْ فِيهِ فَقُومُوا ‏"‏ ‏.‏
Jundub b. 'Abdullah al-Bajali reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Recite the Qur'an as long as your hearts agree to do so, and when you feel variance between them (between your hearts and tongues), then get up (and leave its recital for the time being)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book of Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।