सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6435

नंबर 6435किताब 44, नंबर 264अरबी नंबरिंग 2518.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَيَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ قَالَ يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ، عُمَرَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ غِفَارُ غَفَرَ اللَّهُ لَهَا وَأَسْلَمُ سَالَمَهَا اللَّهُ وَعُصَيَّةُ عَصَتِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Allah has granted pardon to the tribe of Ghifar and to the tribe of Aslam Allah has granted safety and as for Usayya tribe, they disobeyed Allah and His Messenger

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।