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सहीह मुस्लिम

नंबर 6434

नंबर 6434किताब 44, नंबर 263अरबी नंबरिंग 2517
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنِ اللَّيْثِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ أَبِي أَنَسٍ، عَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ خُفَافِ بْنِ إِيمَاءَ الْغِفَارِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي صَلاَةٍ ‏ "‏ اللَّهُمَّ الْعَنْ بَنِي لِحْيَانَ وَرِعْلاً وَذَكْوَانَ وَعُصَيَّةَ عَصَوُا اللَّهَ وَرَسُولَهُ غِفَارُ غَفَرَ اللَّهُ لَهَا وَأَسْلَمُ سَالَمَهَا اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏
Khufaf b. Jura' reported that Allah's Messenger (ﷺ) said in prayer:O Allah, hurl curse upon the tribe of Lihyan and Ri'l aid Dhakwan and Usayya for they disobeyed Allah and His Messenger, (and for) Ghifar Allah has granted pardon and for the tribe of Aslam Allah has granted safety

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।