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सहीह मुस्लिम

नंबर 6436

नंबर 6436किताब 44, नंबर 265अरबी नंबरिंग 2518.02
حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي أُسَامَةُ، ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَالْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، كُلُّهُمْ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِهِ وَفِي حَدِيثِ صَالِحٍ وَأُسَامَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ذَلِكَ عَلَى الْمِنْبَرِ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Ibn Umar with a slight variation of wording (and the wording) that Allah's Messenger (ﷺ) said this on the pulpit

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।