अबू हुरैरा से वर्णित है कि उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) हस्सान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के निकट से गुज़रे, जो मस्जिद में शेर पढ़ रहे थे, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें घूरकर देखा। इसपर उन्होंने कहा : मैं मस्जिद के अंदर उनकी उपस्थिति में भी शेर पढ़ता था, जो आपसे उत्तम थे। फिर अबू हुरैरा की ओर पलटे और कहाः मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।