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सहीह मुस्लिम

नंबर 6117

नंबर 6117किताब 43, नंबर 175अरबी नंबरिंग 2358.02
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ - أَحْفَظُهُ كَمَا أَحْفَظُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ - الزُّهْرِيُّ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَعْظَمُ الْمُسْلِمِينَ فِي الْمُسْلِمِينَ جُرْمًا مَنْ سَأَلَ عَنْ أَمْرٍ لَمْ يُحَرَّمْ فَحُرِّمَ عَلَى النَّاسِ مِنْ أَجْلِ مَسْأَلَتِهِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of 'Amir b. Sa'd and the words are. Allah's Messenger (ﷺ) said:The greatest sinner of the Muslims amongst Muslims is one who asked about a certain thing which had not been prohibited and it was prohibited because of his asking about it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।