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सहीह मुस्लिम

नंबर 6116

नंबर 6116किताब 43, नंबर 174अरबी नंबरिंग 2358.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَامِرِ بْنِ، سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ أَعْظَمَ الْمُسْلِمِينَ فِي الْمُسْلِمِينَ جُرْمًا مَنْ سَأَلَ عَنْ شَىْءٍ لَمْ يُحَرَّمْ عَلَى الْمُسْلِمِينَ فَحُرِّمَ عَلَيْهِمْ مِنْ أَجْلِ مَسْأَلَتِهِ ‏"‏ ‏.‏
Amir b. Sa'd reported on the authority of his father that Allah's Messenger (ﷺ) said:The greatest sinner amongst the Muslims is one who asked about a thing (from Allah's Apostle) which had not been forbidden for the Muslims and it was forbidden for them because of his persistently asking about it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।