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सहीह मुस्लिम

नंबर 6096

नंबर 6096किताब 43, नंबर 154अरबी नंबरिंग 2351.01
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَهَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ رَوْحِ بْنِ عُبَادَةَ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَكَثَ بِمَكَّةَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ وَتُوُفِّيَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ ‏.‏
Ibn 'Abbas reported that Allah's Messenger (ﷺ) stayed in Mecca for thirteen years and he died when he had attained the age of sixty three years

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।