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सहीह मुस्लिम

नंबर 6095

नंबर 6095किताब 43, नंबर 153अरबी नंबरिंग 2350.02
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، قَالَ قُلْتُ لِعُرْوَةَ كَمْ لَبِثَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِمَكَّةَ قَالَ عَشْرًا ‏.‏ قُلْتُ فَإِنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُ بِضْعَ عَشْرَةَ ‏.‏ قَالَ فَغَفَّرَهُ وَقَالَ إِنَّمَا أَخَذَهُ مِنْ قَوْلِ الشَّاعِرِ ‏.‏
Amr reported:I said to 'Urwa: How long did Allah's Apostle (ﷺ) stay in Mecca? He said: For ten years. I said: Ibn Abbas says it is some years above ten. He ('Urwa) sought forgiveness for him and said: His statement is based on the verse of a poet

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।