حَدَّثَنَا أَبُو مَعْمَرٍ، إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْهُذَلِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، قَالَ قُلْتُ لِعُرْوَةَ كَمْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِمَكَّةَ قَالَ عَشْرًا . قَالَ قُلْتُ فَإِنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُ ثَلاَثَ عَشْرَةَ .
Amr reported:I said to 'Urwa: How long did Allah's Apostle - (ﷺ) stay in Mecca? He said: For ten years. I said: Ibn 'Abbas says (that he stayed in Mecca) for thirteen years
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।