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सहीह मुस्लिम

नंबर 6097

नंबर 6097किताब 43, नंबर 155अरबी नंबरिंग 2351.02
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ أَبِي جَمْرَةَ الضُّبَعِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ أَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمَكَّةَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ سَنَةً يُوحَى إِلَيْهِ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْرًا وَمَاتَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ سَنَةً ‏.‏
Ibn 'Abbas reported that Allah's Messenger (ﷺ) stayed in Mecca for thirteen years (after he had received revelation) and stayed in Medina for ten years, and he was sixty-three when he died

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।