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सहीह मुस्लिम

नंबर 5984

नंबर 5984किताब 43, नंबर 45अरबी नंबरिंग 2299.01
حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، وَأَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - وَهُوَ ابْنُ زَيْدٍ - حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ أَمَامَكُمْ حَوْضًا مَا بَيْنَ نَاحِيَتَيْهِ كَمَا بَيْنَ جَرْبَا وَأَذْرُحَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There is before you a Cistern and the distance between its two sides is as it is between Jarba' and Adhruh

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।