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सहीह मुस्लिम

नंबर 5983

नंबर 5983किताब 43, नंबर 44अरबी नंबरिंग 2298.02
وَحَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَرْعَرَةَ، حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ عُمَارَةَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مَعْبَدِ بْنِ خَالِدٍ، أَنَّهُ سَمِعَ حَارِثَةَ بْنَ وَهْبٍ الْخُزَاعِيَّ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏.‏ وَذَكَرَ الْحَوْضَ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ قَوْلَ الْمُسْتَوْرِدِ وَقَوْلَهُ ‏.‏
Haritha b. Wahb al-Khuza'i reported Allah's Messeiiger's (ﷺ) words concerning the Cistern like it, but he made no mention of the words of Mustaurid

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।