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सहीह मुस्लिम

नंबर 1108

नंबर 1108किताब 4, नंबर 270अरबी नंबरिंग 497.01
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، أَخْبَرَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْفَزَارِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَصَمِّ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ الأَصَمِّ، أَنَّهُ أَخْبَرَهُ عَنْ مَيْمُونَةَ، زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا سَجَدَ خَوَّى بِيَدَيْهِ - يَعْنِي جَنَّحَ - حَتَّى يُرَى وَضَحُ إِبْطَيْهِ مِنْ وَرَائِهِ وَإِذَا قَعَدَ اطْمَأَنَّ عَلَى فَخِذِهِ الْيُسْرَى ‏.‏
Maimuna, the wife of the Messenger of Allah (ﷺ), reported:When the Messenger of Allah (ﷺ) prostrated himself, he spread his arms, i. e. he separated them so much that the whiteness of his armpits became visible from behind and when he sat (for Jalsa) he rested on his left thigh

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।