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सहीह मुस्लिम

नंबर 1107

नंबर 1107किताब 4, नंबर 269अरबी नंबरिंग 496
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، جَمِيعًا عَنْ سُفْيَانَ، - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَصَمِّ، عَنْ عَمِّهِ، يَزِيدَ بْنِ الأَصَمِّ عَنْ مَيْمُونَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا سَجَدَ لَوْ شَاءَتْ بَهْمَةٌ أَنْ تَمُرَّ بَيْنَ يَدَيْهِ لَمَرَّتْ ‏.‏
Maimuna reported:When the Messenger of Allah (ﷺ) prostrated himself, if a lamb wanted to pass between his arms, it could pass

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।