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सहीह मुस्लिम

नंबर 1109

नंबर 1109किताब 4, नंबर 271अरबी नंबरिंग 497.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، - وَاللَّفْظُ لِعَمْرٍو - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ بُرْقَانَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ الأَصَمِّ، عَنْ مَيْمُونَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا سَجَدَ جَافَى حَتَّى يَرَى مَنْ خَلْفَهُ وَضَحَ إِبْطَيْهِ ‏.‏ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي بَيَاضَهُمَا ‏.‏
Maimuna daughter of Harith reported:When the Messenger of Allah (ﷺ) prostrated, he kept his hands so much apart from each other that when it was seen from behind the armpits became visible. Waki' said: That is their whiteness

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।