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सहीह मुस्लिम

नंबर 1025

नंबर 1025किताब 4, नंबर 187अरबी नंबरिंग 457.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، وَابْنُ، عُيَيْنَةَ ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، عَنْ قُطْبَةَ بْنِ مَالِكٍ، سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ فِي الْفَجْرِ ‏{‏ وَالنَّخْلَ بَاسِقَاتٍ لَهَا طَلْعٌ نَضِيدٌ‏}‏
Qutba b. Malik reported that he had heard the Messenger of Allah (ﷺ) reciting in the morning prayer this:" And the tall palm trees having flower spikes piled one above another" (Al-Qur'an 50:)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।