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सहीह मुस्लिम

नंबर 1024

नंबर 1024किताब 4, नंबर 186अरबी नंबरिंग 457.01
حَدَّثَنِي أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، فُضَيْلُ بْنُ حُسَيْنٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، عَنْ قُطْبَةَ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ صَلَّيْتُ وَصَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَرَأَ ‏{‏ ق وَالْقُرْآنِ الْمَجِيدِ‏}‏ حَتَّى قَرَأَ ‏{‏ وَالنَّخْلَ بَاسِقَاتٍ‏}‏ قَالَ فَجَعَلْتُ أُرَدِّدُهَا وَلاَ أَدْرِي مَا قَالَ ‏.‏
Qutba b. Malik reported:I said prayer and the Messenger of Allah (ﷺ) led it and he recited" Qaf. (I.). By the Glorious Qur'an," till he recited" and the tall palm trees" (l. 10). I wanted to repeat it but I could not follow its significance

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।