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सहीह मुस्लिम

नंबर 1023

नंबर 1023किताब 4, नंबर 185अरबी नंबरिंग 456
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو كُرَيْبٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - أَخْبَرَنَا ابْنُ بِشْرٍ، عَنْ مِسْعَرٍ، قَالَ حَدَّثَنِي الْوَلِيدُ بْنُ سَرِيعٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ، أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ فِي الْفَجْرِ ‏{‏ وَاللَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ‏}‏
Amr b. Huwairith reported:I heard the Messenger of Allah (ﷺ) recite in the morning prayer" Wa'l-lail-i-idhd 'As'asa" (ixxxi)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।