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सहीह मुस्लिम

नंबर 1026

नंबर 1026किताब 4, नंबर 188अरबी नंबरिंग 457.03
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، عَنْ عَمِّهِ، أَنَّهُ صَلَّى مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الصُّبْحَ فَقَرَأَ فِي أَوَّلِ رَكْعَةٍ ‏{‏ وَالنَّخْلَ بَاسِقَاتٍ لَهَا طَلْعٌ نَضِيدٌ‏}‏ وَرُبَّمَا قَالَ ‏{‏ ق‏}‏ ‏.‏
Ziyad b. 'Ilaqa reported it on the authority of his uncle that he said the morning prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) and he recited in the first rak'ah:"And the tall palm trees having flower spikes piled one above another (l. 10) or perhaps Surah Qaf

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।