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सहीह मुस्लिम

नंबर 5685

नंबर 5685किताब 39, नंबर 39अरबी नंबरिंग 2177.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ، وَأَبُو كَامِلٍ قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، ح وَحَدَّثَنِي يَحْيَى، بْنُ حَبِيبٍ حَدَّثَنَا رَوْحٌ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَحَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، كِلاَهُمَا عَنِ ابْنِ، جُرَيْجٍ ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، أَخْبَرَنَا الضَّحَّاكُ، - يَعْنِي ابْنَ عُثْمَانَ - كُلُّهُمْ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ اللَّيْثِ وَلَمْ يَذْكُرُوا فِي الْحَدِيثِ ‏ "‏ وَلَكِنْ تَفَسَّحُوا وَتَوَسَّعُوا ‏"‏ ‏.‏ وَزَادَ فِي حَدِيثِ ابْنِ جُرَيْجٍ قُلْتُ فِي يَوْمِ الْجُمُعَةِ قَالَ فِي يَوْمِ الْجُمُعَةِ وَغَيْرِهَا ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Ibn 'Umar through another chain of transmitters. but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।